ईमानदारी की जीत-Kid Story in Hindi -Myhindiips.com - हिंदी MAI TIPS

Thursday, 7 May 2020

ईमानदारी की जीत-Kid Story in Hindi -Myhindiips.com


ईमानदारी की जीत-Kid Story in Hindi -Myhindiips.com


” सोनू, उठ जा। स्कूल में देरी से पहुंचा तो मास्टरजी से डांट खानी पड़ेगी। ” डांट का नाम सुनते हो सोनू ने फ़ौरन बिस्तर छोड़ दिया और स्कूल जाने के तैयारी में लग गया। उधर माँ ने गरमा गर्म परांठा और दूध उसके आगे रख दिया, जिसे उसने किताबें सँभालते हुए ही ख़तम किया। मन ही मन माँ को धन्यवाद देता पूरे 7 बजे स्कूल पहुंचा तो बच गया।

पिता की अचानक मृत्यु के बाद एक छोटे से कमरे में अपने माँ के साथ रहता था। पिताजी एक सुनार की दुकान पर काम करते थे। उनकी मृत्यु के बाद सुनार ने वह नौकरी माँ को दे दी। माँ की पगार से घर का और सोनू की पढाई का खर्च आराम से चलता था।

दोपहर 2 बजे छुट्टी होते ही सोनू दौड़ कर सुनार की दुकान पर पहुँच जाता। माँ-बेटे के घर के हालात देखते हुए उस सुनार ने सोनू को भी अपने यहाँ काम पर लगा लिया था। लेकिन उसे हमेशा ही स्कूल जाने के लिए प्रेरित करते थे। सोनू को छूट थी कि वह दुकान पर 2 बजे बाद ही आता।

माँ हमेशा सोनू को सचाई और ईमानदारी की कहानियां सुनाती थी। उसको जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमेशा सच और न्याय का सहारा लेने की शिक्षा देती रहती थी। कभी किसी को धोखा देना तो वह सबसे बड़ा पाप समझती थी।

एक दिन शाम को दुकान बंद करते हुए सुनार ने एक बक्सा सोनू को दिया और बोले ” मैं कहीं जा रहा हुँ। इसमें कीमती हीरे-जेवरात हैं, संभाल के लेजाना और मेरे घर पर छोड़ देना। ”

सोनू ने बक्सा लिया और चल पड़ा सुनार के घर की तरफ। रास्ते में उस बक्सा को खोल कर देखने का विचार भी आया उसके मन में, लेकिन फिर माँ के पढ़ाये ईमानदारी के सब पाठ उसे याद आ गए।उसने बिना खोले ही उस बक्से को सुनार के घर छोड़ दिया।

अगले दिन दोपहर को जब वह दुकान पर पहुंचा तो सुनार ने उसे अपने पास बुलाया और कहा

” सोनू, कल जो हीरे-जेवरात मैंने तुम्हे दिए थे, उन्हें मेरे घर पहुंचा कर तुमने अपनी ईमानदारी को साबित कर दिया है। तुम सोनू नहीं एक खरा सोना हो। ”

और फिर सुनार ने उसे तरक्की देते हुए अपनी दुकान का मैनेजर बना दिया।

ईमानदारी और सच्चाई पर चलने वाले व्यक्ति के सफल भविष्य को
आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।  

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